रायबरेली- ऊंचाहार में स्वच्छता अभियान के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट जाने कैसे ?

रायबरेली- ऊंचाहार में स्वच्छता अभियान के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट जाने कैसे ?

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रिपोर्ट- सागर तिवारी 

ऊंचाहार (रायबरेली): नगर पंचायत ऊंचाहार में स्वच्छता अभियान के नाम पर सरकारी धन का किस कदर बंदरबांट हो रहा है, इसकी बानगी नगर के मोहल्लों में देखी जा सकती है। महादेवन, मजहरगंज, फाटक भीतर और अलीगंज जैसे प्रमुख मोहल्लों में लाखों की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय आज सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। इन इलाकों में बने शौचालयों में महीनों से ताले लटक रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों में भारी आक्रोश है।
समझिए किस तरह सफाई कर्मचारी के नाम पर वेतन निकालकर खेल होता है। कागजों पर सफाई करके जेब में पैसा डाला जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर मामला भ्रष्टाचार का नजर आता है। इन शौचालयों के बाहर बकायदा सफाई कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर की पट्टिकाएं लगी हैं। आरोप है कि ये कर्मचारी केवल कागजों पर तैनात हैं। ड्यूटी से गायब रहने के बावजूद इनका प्रति माह वेतन नियमपूर्वक निकाला जा रहा है, लेकिन धरातल पर सफाई का नामोनिशान नहीं है। सरकारी खजाने से पैसा तो निकल रहा है, पर उसका लाभ जनता तक नहीं पहुँच पा रहा।

जब कभी अधिकारी जांच के लिए दस्तक देते हैं तो उन्हीं कर्मचारियों को प्रकट कर शौचालय के बाहर तैनात कर दिया जाता है। क्योंकि जांच या निरीक्षण पूर्व निर्धारित होता है जिसके चलते यह पहले से ही जुगत में लग जाते हीं और हर तोड़ का जोड़ ढूंढकर कर लेते हैं। यह कलम खिलाड़ी इस तरह से सरकारी धन की हेराफेरी करते हैं इनकी हेराफेरी पकड़ने के लिए कि आईएएस और पीसीएस के भी पसीने छूट जाते हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में किस तरह से नगर पंचायत द्वारा भ्रष्टाचार कर सरकारी धन की हेरा फेरी की जा रही है। 

ऊंचाहार नगर में गंदगी का साम्राज्य स्थापित है। आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि जिन इक्का-दुक्का शौचालयों के ताले खुले भी हैं, उनकी स्थिति नारकीय है। साफ-सफाई के अभाव में ये शौचालय बीमारियों का केंद्र बन रहे हैं। गंदगी और सड़न के कारण लोग इनके पास से गुजरने में भी कतराते हैं। महादेवन और अलीगंज जैसे व्यस्त इलाकों में शौचालयों का बंद होना नगर पंचायत की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
हैरानी की बात यह है कि मोहल्ले दर मोहल्ले जनता परेशान है और सरकारी धन की खुलेआम बर्बादी हो रही है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। सफाई कर्मचारियों द्वारा बिना काम किए वेतन लेना एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। इतने गंभीर मुद्दे पर प्रशासन की चुप्पी यह दर्शाती है कि स्वच्छता केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन शौचालयों को तुरंत चालू नहीं किया गया और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला प्रशासन के द्वार पर दस्तक देंगे। स्थानीय लोगों को आला अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद है।