रायबरेली-साहब हमको पता नहीं कि इतना पैसा खाता में कहा से आया और चला गया सो रही ऊंचाहार पुलिस,,,?

रायबरेली-साहब हमको पता नहीं कि इतना पैसा खाता में कहा से आया और चला गया सो रही ऊंचाहार पुलिस,,,?

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 रिपोर्ट-सागर तिवारी 



ऊंचाहार-रायबरेली- साहब हमको पता नहीं कि इतना पैसा खाता में कहा से आया और चला भी गया। और हम लोग जैसे के तैसे ही रह गए। यह दर्द खाता धारकों का है।खाता धारकों को बैंक में खाता खुलवाने के लिए  पैसा एफआईआर में अभियुक्त बनाए गए एक युवक ने दिया था। यही नहीं खाता धारकों को एक से दो हजार रुपए खर्चा के नाम पर भी दिया था। पचास लाख रुपए के आस पास जालसाजो खाते में भेजकर उड़ा भी दिया। लेकिन पैसा कहा से आया और कहा गया यह आज तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने शिकायत के बाद मामले को सेटिंग गेटिंग के बाद निपटाने लग गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक की फटकार के बाद तंद्रा से जागी पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करके ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने इस मामले में इतने पैसे की फंडिंग कहा से कैसे हुई इसका पता लगाना भी उचित नहीं समझा है। खाता धारकों का दर्द कोई नहीं सुन रहा है।
                         क्षेत्र के झाला बाग निवासी राजेश कुमार, राजू, बब्लू, हिमांशु, हरीशचंद्र, सुनील व सुमेर बाग निवासी संजीव कुमार व इनकी पत्नी गीता देवी समेटे करीब आधा दर्जन लोगों ने नवंबर माह में पुलिस को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था। कि गोपालपुर उद्धवन निवासी अमित कुमार मौर्य जो जन सुविधा संचालक हैं। और बैंक के लेन देन का काम करते हैं। वहअपने सहयोगी हटवा गांव निवासी लवकुश के साथ संपर्क किया था। और बिना किसी गारंटर के प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत पांच लाख रुपए का लोन करा देने की बात कही जिसकी एवज में एक लाख रुपए कमीशन की मांग की थी। खाताधारकों का कहना है। कि मामला तय होने के बाद जालसाज युवक ने एक एक हजार रुपए स्वयं देकर खाता खुलवाया था। और बाद में एक से दो हजार रुपए खर्च के लिए भी दिया। और किसी कोई बात नहीं बताने को कहा था। राजू व संजीव कुमार ने बताया कि वही हम लोगों का आधार कार्ड व मोबाइल सिम को गारंटी को तौर पर ले लिया गया।खाता खुलने के बाद जब पास बुक प्रिंट कराने बैंक गए। तो पता चला कि खाते में पांच से छ लाख व गीता के खाते में ग्यारह लाख रुपए समेत करीब पच्चास लाख रुपए लोगो के खाते में आने के बाद निकल भी गए। यह बात बैंक मैनेजर के कहने के बाद लोगों के होस उड़ गए। तब सभी खाता धारक जन सुविधा संचालक अमित से संपर्क किया तो आरोप है। कि उसने किसी से बताने पर धमकी दी थी। जिसके बाद सभी लोग कोतवाली पुलिस को शिकायती पत्र देकर खाता में आए लाखों रुपए की खोजबीन करने की गुहार लगाई थी। लेकिन पुलिस ने भी इस अंतर्जनपदीय गिरोह की जांच करना उचित नहीं समझा है। और सेटिंग गेटिंग के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। जिसकी आधी अधूरी खबर इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई थी। वायरल खबर को संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। फटकार के बाद नींद से जागी पुलिस ने खाताधारकों को थाना बुलाया और दूसरी तहरीर लेकर नाम जद दोनों लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच करने का हवाला देते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने न तो आरोपियों को पकड़ना मुनासिब समझा है। और न ही इसे साइबर अपराध के तार किस संगठन से जुड़ा है इस विषय में ही पता लगाना उचित समझा है। पुलिस की इस तरह की कार्यशैली से लोगों में तरह तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है। कि जब पुलिस इस तरह के बड़े मामले में निष्क्रियता दिखा रही है। तो लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।