रायबरेली-रतनश्री की सांसों में समाई है सरस्वती,हर धड़कन जीत लेता है दिल,,,,,

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    रिपोर्ट-सागर तिवारी

ऊंचाहार-रायबरेली-कहते हैं मेहनत और लगन से साधना की जाए तो ईश्वर को भी पाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही ऊंचाहार के होनहार किशोर ने कर दिखाया है। पिता पेशे से पशु चिकित्सक हैं माता ग्रहणी हैं। उनका संगीत कला से कोई पीढ़ियों तक कोई लेना देना नहीं है। फिर भी उनके बेटे रतन किशोर ने मात्र 12 साल की उम्र में ही अपनी संगीत का लोहा मनवा दिया। उन्होंने बांसुरी वादन में कई प्रतियोगिता में प्रथम स्थान और पुरस्कार अपने नाम किया है। 
दरअसल गदागंज थाना क्षेत्र के जलालपुर धईं मूल सुरेश कुमार गुप्ता पेशे से पशु चिकित्सक हैं। वह करीब बीस वर्षों से ऊंचाहार नगर से जुड़े अकोढिया रोड पर माकान बनाकर निवास करते हैं। उनके बेटे रतनश्री ने बांसुरी वादन में काशी, प्रयागराज और लखनऊ में आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया है। 
रतनश्री महज 12 वर्ष के हैं। वह एनटीपीसी आवासीय परिसर स्थित चिन्मया विद्यालयों में कक्षा 7 के छात्र हैं और अध्ययनरत हैं। वर्ष 2020 में कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन में घर पर बैठे बैठे उन्होंने टीवी और मोबाईल फोन पर संगीत सुना, बांसुरी, हारमोनियम जैसी कला देखी और सुनी। रतन उसी संगीत में लीन होते गए और एक दिन उन्होंने अपने पिता से हारमोनियम खरीद कर देने को कहा उनके पिता को पहले तो अजीब लगा किन्तु बेटे की खुशी के लिए खेलने के उद्देश्य से लाकर दे दिया। इसके बाद रतन ने बांसुरी मंगवाई और पिता ने बांसुरी भी लाकर दे दी। रतन की माता किरण वैश्य बताती हैं कि बेटा रतन पूरा पूरा दिन बांसुरी से और निकालने में इतना व्यस्त रहता था कि वह कभी कभी तो रो पड़ता था। फिर धीरे धीरे उसने सुर पकड़ लिया तो पिता ने उसके ही स्कूल के संगीत सिखाने वाले शिक्षक आदित्य मिश्रा को बेटे की संगीत सिखाने के लिए लगा दिया। संगीत सीखने वर्ष 2023 के दौरान ही पहली बार रतनश्री ने प्रयाग संगीत समिति द्वारा आयोजित आल इंडिया अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और अपने कला का जौहर दिखाते हुए बांसुरी वादन में प्रथम स्थान अपने नाम दर्ज किया। फ़िर इसके बाद यह सिलसिला नहीं रुका रतन को यही से बांसुरी वादन में उपलब्धि मिल चुकी थी। मार्च 2025 में उन्हें काशी में आयोजित संस्कृति मंत्रालय की काशी वंदन संस्कृति संध्या कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। यहां भी उन्होंने अपनी बांसुरी वादन कला का लोहा मनवाया और श्वेताओं का मन मोहा। रतन को वहां के डीएम ने प्रमाण देकर सम्मानित किया। करीब चार दिनों पूर्व ही रतन श्री ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक एकेडमी लखनऊ में संस्कृति संभागीय शास्त्री एवं सुगम संगीत मंडलीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और यहां भी रतनश्री ने अपनी बांसुरी वादन का जौहर दिखाते हुए कुल 3 प्रतिभागियों में प्रथम स्थान हासिल किया। 
शनिवार को रतन के घर पहुंचने पर उनके रिश्तेदार ओर पड़ोसियों का बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। 

रतनश्री की मां किरण वैश्य ग्रहणी हैं। वह बताती हैं कि बेटे रतन के संगीत सीखने के शुरुआती दौर में परिवार के लोगो में थोड़ी नाराजगी थी किन्तु उसकी प्रतिभा को देख कर बाद में सभी ने उसका सहयोग किया। रतन की बड़ी बहन राधिका 2024 में इंटरमीडिएट परीक्षा पास की है। मां किरण वैश्य ने बछरावां से एमए बीएड की शिक्षा ग्रहण की है। 
रतनश्री को संगीत अलावा क्रिकेट और शतरंज खेलना बेहद पसंद है। वह संगीत सीखने में प्रतिदिन 1 घण्टे देते हैं। उन्हें अलग अलग आयोजनों से बांसुरी वादन के लिए आमंत्रित किया जाता है। उनकी इस उपलब्धि में उनके स्कूल प्रबंधन का भी अहम योगदान है। रतन वर्तमान समय में प्रयागराज के संस्थान से डिग्री हासिल करने के लिए अध्यनरत हैं।