क्या सरकार की प्रोत्साहन योजना का क्षेत्र वासियों को भी मिलेगा लाभ? जर्जर सिनेमाघर फिर हो पायेगे शुरू

क्या सरकार की प्रोत्साहन योजना का क्षेत्र वासियों को भी मिलेगा लाभ? जर्जर सिनेमाघर फिर हो पायेगे शुरू

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रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647

बछरावा रायबरेली- प्रदेश की योगी सरकार के द्वारा जनपद में लंबे समय से बंद और खस्ताहाल सिनेमाघरों को फिर से संजीवनी देने का काम किया जा रहा है। सरकार ने इन सिनेमाघर को दोबारा खोलने के लिए एक प्रोत्साहन योजना लागू की है। जिससे दर्शको को एक बार फिर से अपने ही क्षेत्र में बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का आनंद मिल सकेगा। सरकार की इस योजना के अंतर्गत संचालकों को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। योजना में जर्जर सिनेमा हॉल को छोटे कॉम्प्लेक्स में तब्दील करने या पुराने को अपग्रेड किया जाएगा। 75 या उससे अधिक सीट के एकल स्क्रीन व नए मल्टीप्लेक्स को बढ़ावा देने की योजना से सिनेमा व्यवसाईयों को लाभ मिलेगा। सरकार की इस योजना के अंतर्गत पूर्व में प्रदेश सरकार के चलचित्र निगम के द्वारा बनाए गए क्षेत्र के पटेल नगर में स्थित "चलचित्र" व कस्बे के "कमला पैलेस" को भी शामिल करने के लिए क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है, उक्त सिनेमाघर जो विगत 24 से 25 वर्षों से खस्ताहाल एवं जर्जर स्थिति में पड़े हुए है, उनके पुनर्निर्माण को लेकर इस वक्त क्षेत्रीय लोगों की नजरें मनोरंजन विभाग पर अटकी हुई है और क्षेत्रीय लोग जनपद के मनोरंजन अधिकारियों के द्वारा जारी सूची का इंतजार भी करते हुए नजर आ रहे हैं कि, क्या उन्हें अब बड़े पर्दे पर फिल्म देखने के लिए अपने ही क्षेत्र में सुविधाएं उपलब्ध हो जाएगी और उन्हें लखनऊ या रायबरेली की ओर नहीं जाना पड़ेगा। क्षेत्रीय नागरिक अंबेश सिंह, रमेश शुक्ला, शशिकांत मिश्रा, सतीश सिंह, हरिओम सिंह, जय चंद्र तिवारी, भगवान कुमार अवस्थी, अमित शुक्ला, डॉक्टर चंद्रमणि त्रिपाठी, मनोज मिश्रा, प्रमोद शुक्ला, सुनील सागर, डॉक्टर विजयपाल यादव, दिनेश त्रिवेदी, मुकुट बिहारी मिश्रा, आशुतोष शुक्ला, अन्नू शुक्ला "गुरुजी" सहित सैकड़ो लोगों ने प्रदेश सरकार एवं जनपद के मनोरंजन अधिकारियों से निवेदन किया है कि, वह क्षेत्र के इन जर्जर सिनेमाघरों "चलचित्र" और "कमला पैलेस" को फिर से शुरू कराकर क्षेत्रीय लोगों को बड़े पर्दे पर फिल्म का आनंद प्राप्त कराये, ताकि उन्हें अन्य स्थानों पर बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का आनंद लेने के लिए न जाना पड़े।