क्या हर दिवाली पर मां लक्ष्मी की नई मूर्ति खरीदना होता है जरूरी? जानें क्या है मान्यता और सही नियम
अगर आप दिवाली पर मां लक्ष्मी की नई मूर्ति खरीदने जा रहे हैं तो सबसे पहले जान लीजिए कि हर दिवाली पर मां लक्ष्मी की नई मूर्ति खरीदना क्यों जरूरी होता है. इसके पीछे क्या मान्यता होती है.
मान्यताओं के मुताबिक, दिवाली पर नई मूर्ति एक आध्यात्मिक विचार का भी संचार करती है जैसा कि गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि नई मूर्ति लाने से घर में नई ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए दिवाली पर नई मूर्तियों की स्थापना करना शुभ माना जाता है. लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि सिर्फ मिट्टी की मूर्तियां बदलने की परंपराएं हैं जबकि सोने या चांदी की मूर्तियां जो सालभर तिजोरी में रखी रहतीं हैं, उन्हे कभी नहीं बदला जाता. उन्हे केवल दिवाली के दिन पूजा स्थल पर लाकर पूजा की जाती है. शेष समय वो तिजोरी में स्थापित रहती हैं.
इन बातों का रखें खास ध्यान
- मां लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति न चुनें जिसमें मां लक्ष्मी उल्लू पर विराजमान हों. ऐसी मूर्ति को काली लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है.
- माता लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति खरीदनी चाहिए, जिसमें वो कमल के फूल पर विराजमान हों और उनका हाथ वरमुद्रा में हो और धन की वर्षा करता हो.
- कभी भी लक्ष्मी मां की ऐसी मूर्ति न खरीदें जिसमें वो खड़ी हों. ऐसी मूर्ति लक्ष्मी मां के जाने की मुद्रा में तैयार माना जाता है.
- मां लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदते समय ये ध्यान रखें कि उनके साथ गणेश जी की मूर्ति अवश्य होनी चाहिए. क्योंकि हिन्दू धर्म में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता भगवान गणेश जी है.
मूर्ति लेते समय इन बातों का रखें ख्याल
दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेशजी की मूर्तियां दिवाली से पहले धनतेरस के दिन खरीदना ही शुभ माना गया है. शास्त्रों के मुताबिक, धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी को घर लाना अत्यंत शुभ माना गया है. दिवाली पर मूर्ति पूजन के लिए इस बात का विशेष ध्यान रखे क लक्ष्मी-गणेशजी की एक साथ वाली मूर्ति न खरीदें, बल्कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेशजी की अलग- अलग मूर्तियां ही खरीदें.

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