ऊंचाहार:"गरीबों की मददगार" होने का दम भरने वाली पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में जाने क्या है पूरा मामला,,,,?

ऊंचाहार:"गरीबों की मददगार" होने का दम भरने वाली पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में जाने क्या है पूरा मामला,,,,?

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 रिपोर्ट-सागर तिवारी


ऊंचाहार-रायबरेली-"गरीबों की मददगार" होने का दम भरने वाली पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के फरीदपुर गांव में एक दलित परिवार पर हुए हमले के मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली ने खाकी को शर्मसार कर दिया है। आरोप है कि पुलिस ने अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय, खून से लथपथ पीड़ित परिवार को ही डरा-धमकाकर थाने से भगा दिया।
घटना रविवार की है, जब खेत की रस्सी काटने का विरोध करने पर दबंगों ने अमृत लाल और उनके पूरे परिवार पर लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया। अमृत लाल की पत्नी सुनीता और बेटी खुशी का आरोप है कि दबंगों ने उन्हें घर के अंदर खींचकर पीटा। हमले में अमृत लाल की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। 
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ पुलिस की भूमिका को लेकर आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब वे लहूलुहान हालत में न्याय की गुहार लेकर ऊंचाहार थाने पहुंचे, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय दबंगों का साथ दिया। पीड़ित की बेटी ने वीडियो बयान जारी कर सीधा आरोप लगाया है कि उनके मूल प्रार्थना पत्र को पुलिस ने ठिकाने लगा दिया, पुलिस के संरक्षण में 'कोहिनूर' नामक व्यक्ति ने मनमाफिक नई तहरीर तैयार की, पीड़ित महिला से जबरदस्ती सादे कागज पर अंगूठा लगवाया गया, कार्रवाई के नाम पर उल्टा पीड़ितों को ही चालान और जेल भेजने की धमकी दी गई, पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी पक्ष के पास पेट्रोल पंप है और वे रसूखदार हैं। क्या इसी रसूख के आगे ऊंचाहार पुलिस ने घुटने टेक दिए हैं? पुलिस ने अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी तो दूर, संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करना भी मुनासिब नहीं समझा।
एसपी से लगाई न्याय की अंतिम गुहार स्थानीय थाने से दुत्कारे जाने के बाद अब पीड़ित परिवार ने जिले के पुलिस कप्तान (SP) की चौखट पर दस्तक दी है। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और पुलिस की इस 'सांठगांठ' की जांच नहीं की गई, तो उनके पास आत्मदाह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
अब देखना यह है कि क्या कप्तान की सख्ती के बाद ऊंचाहार पुलिस की 'कुंभकर्णी नींद' टूटती है या फिर रसूखदारों के आगे कानून ऐसे ही बौना बना रहेगा।
पूरे मामले में मंगलवार की शाम 6 बजे जानकारी देते हुए कोतवाल अजय कुमार राय ने बताया कि मारपीट की घटना हुई थी। जिसमें पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। तहरीर बदलने की बात पर उन्होंने बताया कि पीड़ित को लिखना नहीं आता है इसलिए कोहेनर नाम के व्यक्ति ने एप्लिकेशन लिखा है। आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। 

ऊंचाहार कोतवाल ने कप्तान को किया गुमराह आखिर ऐसा क्या हुआ जो पीड़ित को ही करना पड़ा चालान आज भी चल रहा जिले में इलाज आखिर क्यों तहरीर का हुआ बदलाव यह एक बड़ा सवाल है,,,,?