रायबरेली-चोरी रोकने में नाकाम साबित हो रहे बछरावां थानेदार

रायबरेली-चोरी रोकने में नाकाम साबित हो रहे बछरावां थानेदार

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रिपोर्ट-अमित अवस्थी

अज्ञात चोरों ने फिर दिया बछरावा पुलिस को चकमा, बेसर साबित होता हुआ दिखा एसपी का निरीक्षण

शटर का ताला तोड़कर चोरों ने गोदाम से लाखों रुपए की नगदी की पार, मचा हड़कंप

35 दिन का कार्यकाल, आधा दर्जन से अधिक चोरियां, कार्यशैली पर उठ रहे प्रश्नचिन्ह

बछरावां -रायबरेली-वर्तमान समय में लगातार क्षेत्र में हो रही चोरी की घटनाओं से क्षेत्रीय लोगो में भय व्याप्त होने के साथ-साथ स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह उठते हुए उनकी तो जमकर किरकिरी करा ही रहे है, साथ ही रविवार को पुलिस अधीक्षक रायबरेली रवि कुमार द्वारा थाने के किए गए आकस्मिक निरीक्षण एवं थाना प्रभारी व उनकी पुलिस को दिए गए दिशा निर्देशों को भी बछरावां पुलिस ताख पर रखते हुए उनकी छवि को धूमिल करने का काम कर रही है। क्योकि अज्ञात चोरों ने उनकी पुलिस की गस्त को तो तितर बितर कर ही दिया है, साथ ही साथ उनकी कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते रविवार को पुलिस अधीक्षक रायबरेली रवि कुमार के थाने के निरीक्षण के 12 घंटे के पश्चात ही चोरों ने रविवार व सोमवार की रात कस्बे की कसरावा मोड पर स्थित एक निजी ऑनलाइन कंपनी फ्लिपकार्ट के गोदाम के शटर का ताला तोड़कर उसे उठाने के पश्चात लाखों रुपए की नगदी व कुछ अन्य जरूरी सामान पार करते हुए स्थानीय पुलिस को एक बार पुनः चकमा दिया है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए उक्त ऑनलाइन कंपनी के कर्मचारी अरविंद कुमार ने बताया कि बीती रात चोरों ने उनके गोदाम के सटर का ताला तोड़कर उसे उठाकर गोदाम के अंदर रखा एक लाख 82 हजार 210 रुपए नगद एवं सीसीटीवी कैमरे का लगा डीबीआर व कुछ अन्य जरूरी सामान पार कर दिया। साथ ही साथ उक्त अज्ञात चोरों के द्वारा कुछ पैकेट फाड़कर गोदाम के अंदर वह बाहर भी फेंक दिए गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी है। वही सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस जांच पड़ताल में जुटी हुई है। इस बाबत थाना प्रभारी श्याम कुमार पाल ने बताया कि घटना की जानकारी प्राप्त हुई है, जांच पड़ताल की जा रही है, जल्द ही चोरों को पकड़ा जाएगा। लेकिन सवाल यह उठना है की वर्तमान थाना प्रभारी के मात्र 35 दिन के कार्यकाल में आधा दर्जन से अधिक घटित हो चुकी चोरी की घटनाओं में चोरों को पकड़ने की बात सिर्फ उनके द्वारा हर बार की जा रही है, न ही वह उन्हें पकड़ पा रहे हैं और न ही किसी घटना का खुलासा करने में वह अपना सकारात्मक प्रभाव दिखा पा रहे हैं। जो कहीं न कहीं उनके एवं उनकी पुलिस के लिए नासूर बनता जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्तमान थाना प्रभारी व उनकी पुलिस कब तक अपनी कथनी को करनी में तब्दील करने के साथ अपनी पुलिस के ऊपर लग रहे प्रश्नचिन्हों पर विराम लगाते हुए नजर आते हैं, यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है? जो फिलहाल अभी तक उनके लिए टेढ़ी खीर साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है।