आस्था का केंद्र बना लसोडेश्वर महादेव मंदिर 150 वर्षों से अधिक पुराना मंदिर, जहाँ फूल तो आते हैं पर फल नहीं लगते

आस्था का केंद्र बना लसोडेश्वर महादेव मंदिर 150 वर्षों से अधिक पुराना मंदिर, जहाँ फूल तो आते हैं पर फल नहीं लगते

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824


लसोडेश्वर महादेव मंदिर: जहां एक वृक्ष पर चमत्कार बना लोगों की आस्था का केंद्र
150 वर्षों से अधिक पुराना मंदिर, जहाँ फूल तो आते हैं पर फल नहीं लगते

डलमऊ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सभा दरिगापुर (जनपद रायबरेली) स्थित प्राचीन लसोडेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि एक जीवंत चमत्कार का प्रतीक भी है। लगभग डेढ़ शताब्दी पुराने इस मंदिर से जुड़ी एक अनोखी मान्यता आज भी लोगों की गहरी आस्था को मजबूत करती है।

मंदिर परिसर में स्थित एक लसोड़े के वृक्ष को लेकर कहा जाता है कि दशकों से उसमें केवल फूल आते हैं, परंतु फल कभी नहीं लगते। इसके पीछे एक चमत्कारी प्रसंग है जिसे साझा किया टीबी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री करुणा शंकर मिश्र ने, जो स्वयं ग्राम सभा दरिगापुर के मूल निवासी हैं।

उन्होंने बताया कि यह वृक्ष उनके सगे बाबा, पंडित शिव लोचन प्रसाद मिश्र (बाबा श्री) के समय से मंदिर में स्थित है। एक बार बाबा श्री कुछ ग्रामीणों के साथ मंदिर में थे, जब देखा गया कि जानवर पेड़ पर चढ़कर फल खा रहे हैं और मंदिर की मर्यादा भंग हो रही है। इस पर गांववासियों ने भगवान लसोडेश्वर महादेव से प्रार्थना की:
"हे महादेव, इस वृक्ष में केवल फूल आएं, लेकिन फल न लगें।"
आश्चर्यजनक रूप से उसी दिन से लेकर आज तक उस वृक्ष में कभी फल नहीं लगे—यह आज भी गाँव में आस्था और चमत्कार की मिसाल बना हुआ है।

???? श्रद्धा की कथा – करुणा शंकर मिश्र के शब्दों में

श्री मिश्र ने बताया कि जब उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और नौकरी प्राप्त की, तब से यह मंदिर उनके जीवन का भावनात्मक और आध्यात्मिक केंद्र बन गया। वे कहते हैं:
"अब तक कई बार रामचरितमानस का पाठ कर चुका हूँ। हर बार यहाँ बैठकर जो शांति मिलती है, वह शब्दों से परे है।"

उन्होंने यह भी बताया कि गांव में हर वर्ष रामचरितमानस का पाठ होता है, और कभी-कभी तो साल में एक से अधिक बार। यह आयोजन अब पूरे गाँव की पहचान बन चुका है।

गांव के ही दर्जी परिवार से संबंध रखने वाले एक बुजुर्ग, जो 102 वर्ष की आयु तक जीवित रहे, जीवनभर बेलपत्र अर्पण करते और जलाभिषेक करते रहे। आज भी यह परंपरा जीवित है। मंदिर में दूर-दराज़ से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

लगभग चार वर्ष पूर्व मंदिर परिसर में दक्षिणमुखी हनुमान जी महाराज की प्रतिमा की स्थापना की गई, जिससे धार्मिक गतिविधियाँ और भी तेज़ हुई हैं।

इस पावन अवसर पर डॉ महेश कुमार मिश्रा, प्रयाग नारायण मिश्र, प्रकाश नारायण मिश्र, श्री आशीष मिश्रा, अनुराग मिश्रा, अंशुमान मिश्रा, श्री नारायण मिश्र, आशीष कुमार, के साथ-साथ डॉ. राजेंद्र मिश्रा, डॉ. निशांत मिश्रा, डॉ. रोली मिश्रा एवं उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मंदिर पहुँचे और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना में सहभागी बने।

आज ग्राम सभा दरिगापुर का यह मंदिर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, चमत्कार और सांस्कृतिक परंपरा का केंद्र बन चुका है।

“महादेव बाबा की जय!
लसोडेश्वर भगवान महादेव की जय!”