रायबरेली - बिना लिखित आदेश बंद हुआ संचालित विद्यालय- पत्रांकों में उलझा सच, जवाबदेही गायब

रायबरेली - बिना लिखित आदेश बंद हुआ संचालित विद्यालय- पत्रांकों में उलझा सच, जवाबदेही गायब

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रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647

न खाता न बहीं, जो बीईओ कार्यालय बछरावां कहें वही सही

आखिर बीईओ कार्यालय बछरावां की जांच कब! नियम विरुद्ध उच्चाधिकारियों का सरंक्षण आखिर कब तक

बछरावां रायबरेली- विकास क्षेत्र बछरावां के ग्राम रामपुर मजरे शेखपुर समोधा में वर्ष 2014 में स्वीकृत प्राथमिक विद्यालय का प्रकरण अब प्रशासनिक विसंगतियों का जीवंत उदाहरण बन गया है। खंड शिक्षा अधिकारी, बछरावां द्वारा पत्रांक विद्या0संचा0/92/2014-15 दिनांक 08.07.2014 के माध्यम से विद्यालय का संचालन 10 जुलाई 2014 से प्रारंभ कराया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा तीन बीटीसी प्रशिक्षुओं की नियुक्ति की गई तथा एसएमसी खाते में निर्माण एवं अन्य मदों हेतु धनराशि भी प्रेषित की गई। अर्थात विद्यालय विधिवत स्वीकृति, आदेश और वित्तीय अनुमोदन के साथ अस्तित्व में आया।किन्तु मात्र दो वर्ष पश्चात, पत्रांक प्रबंध/मेमो/2016-17 दिनांक 15.10.2016 के आधार पर संचालित शिक्षक को मूल विद्यालय भेज दिया गया और विद्यालय का संचालन ठप हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि विद्यालय को बंद करने का कोई स्पष्ट, सक्षम और पृथक लिखित आदेश आज तक उपलब्ध नहीं है। यदि संचालन वैध था तो बंद करने का आदेश कहाँ है? और यदि संचालन अवैध था तो 08.07.2014 के आदेश के आधार पर इसे प्रारंभ क्यों किया गया? यह विरोधाभास स्वयं प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।विभागीय सूचनाओं में भी स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। ग्रामवासी हनोमान द्वारा मांगी गई जनसूचना के उत्तर में दिनांक 08.01.2025 को विद्यालय के 10 जुलाई 2014 से संचालित होने की पुष्टि की गई, जबकि पत्रांक 962–963/2024-25 दिनांक 27.01.2025 में इसे नियमों के विपरीत बताया गया। राज्य सूचना आयोग में भूमि विवाद का उल्लेख किया गया,जबकि आईजीआरएस निस्तारण में मानक दूरी का तर्क प्रस्तुत किया गया। एक ही प्रकरण में अलग-अलग कारण दर्शाना इस बात का संकेत है कि विभाग स्वयं अपने निर्णयों के औचित्य को लेकर स्पष्ट नहीं है। सबसे गंभीर पहलू वित्तीय अनियमितता का है। निर्माण कार्य न होने के बावजूद एसएमसी खाते में 10 लाख रुपये से अधिक धनराशि अब भी जमा बताई जा रही है। जबकि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पत्रांक जि0का0स0शि0अ0/2364/2018-19, वित्त/अप्रयुक्त धनराशि/541/2020-21 तथा एस0एस0ए0/651-55/2020-21 के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि निर्माण न होने की स्थिति में धनराशि राजकोष में वापस की जाए। 11 वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण हुआ और न ही धनराशि वापस की गई, जो वित्तीय अनुशासन की गंभीर अनदेखी का संकेत है। रामपुर का यह विद्यालय अब केवल एक शैक्षिक संस्थान नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन चुका है। एक ओर 08.07.2014 का संचालन आदेश है, दूसरी ओर 15.10.2016 के बाद का मौन; एक ओर 08.01.2025 की स्वीकृति, दूसरी ओर 27.01.2025 का विरोधाभास। इन पत्रांकों के बीच सच्चाई कहीं दब गई है।ग्रामवासियों ने माँग की कि अब आवश्यक है कि बछरावां बीईओ कार्यालय की संपूर्ण शिकायतों की समयबद्ध, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच समय से कर सभी आदेशों की वैधता सार्वजनिक की जाए तथा समस्त नियम विरुद्ध कार्यो,एवम बिना लिखित आदेश संचालित विद्यालय बंद कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। अन्यथा यह मामला शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक मनमानी का स्थायी उदाहरण बनकर रह जाएगा।