रायबरेली में आखिर कौन है जो अवैध तरीके से स्टैंड बना कर डग्गामार बसों में भरी जा रही सवारियां

रायबरेली में आखिर कौन है जो अवैध तरीके से स्टैंड बना कर डग्गामार बसों में भरी जा रही सवारियां

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824

सड़कों पर चौधरी बस सर्विस की बसों का आतंक जिम्मेदार मौन 

कस्बे में जाम का कारण डग्गामार बसों का सड़क पर खड़ा होना भी

रायबरेली-जिम्मेदारों की नजरदांजी का आलम कहें की मिलीभगत का खेल कुछ तो जरूर है, जिसकी वजह से बगैर परमिट डग्गामार बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं, बसों में सवारियों को ढोने के साथ ही इन बसों में और क्या क्या ले जाया जा रहा है, इसकी भी कभी पड़ताल नहीं होती सेटिंग गेटिंग की बेहतरीन गठजोड़ के चलते डग्गामार बसें एक प्रांत से दूसरे प्रांत तक बकायदा बे रोक टोक पहुंच रही हैं, सवारियों ढोने के बहाने इन में कहीं गोरखधंधा तो नहीं चल रहा जैसा पहले कई बार हो चुका है।
महराजगंज से दिल्ली तक इन दिनों चौधरी बस सर्विस की बसों का आतंक है, इनके संचालक बकायदा अवैध रूप से बड़े कस्बों में मुख्य मार्गों पर सवारियां भरने के लिए बकायदा स्टैंड बना के रखे हुए हैं, जहां से सवारियां भरकर गंतव्य को रवाना होते हैं,ओवरलोड अधिक सवारियां जैसे अन्य मानकों की जांच पड़ताल के लिए परिवहन विभाग के अधिकारी सड़कों पर तो दिखते हैं लेकिन मजाल है कि कोई अफसर चौधरी बस सर्विस के नाम पर चलने वाली डग्गामार बसों को रोककर पड़ताल कर ले।
वर्तमान में इस नाम की बसें सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर दौड़ रही हैं, जो रोजाना लखनऊ सीतापुर कानपुर दिल्ली तक जा रही हैं, इनके ऐजंट हर गली चौराहों पर मौजूद हैं, जो सरकारी बसों पर सफर करने के लिए आने वाली सवारियों को बेहतर व्यवस्था देने के नाम पर गुमराह करके अपनी बसों से जाने की बात कहते हैं।

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सरकारी राजस्व को लग रहा चूना 
परिवहन विभाग की बसों में सफर करने के लिए आने वाली सवारियों को डग्गामार संचालकों के एजेंटों द्वारा अच्छी व्यवस्था और कम किराए के नाम पर गुमराह कर ले जाया जाता है, इसके बाद मनमानी की जाती है,और बेतरतीब तरीके से सवारियों को भरा जाता है, स्थिति ये है, कि रोडवेज की बसों को सवारियों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

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सेटिंग गेटिंग के सहारे चल रहा पूरा सिंडिकेट 
जानकारों की मानें तो ये सारा खेल बड़े स्तर की सेटिंग गेटिंग के सहारे संचालित हो रहा है, हर जिले में बड़े स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक का वरदहस्त है, और बकायदा महीने वार सबका हिसाब किताब किया जाता है, जिसके फलस्वरूप कारोबार बकायदा फल-फूल रहा है।