बिजली जोड़ने के लिए लाइनमैन मांग रहा घूस, एके शर्मा कॉल सेंटर का कर रहे थे निरीक्षण तभी आ गया फोन

बिजली जोड़ने के लिए लाइनमैन मांग रहा घूस, एके शर्मा कॉल सेंटर का कर रहे थे निरीक्षण तभी आ गया फोन

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ऊर्जा मंत्री एके शर्मा इन दिनों अपने आदेश और एक्शन को लेकर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को भी अचानक कुछ ऐसा हो गया जिससे हर कोई हैरान रह गया। एके शर्मा बिजली शिकायतों के लिए बनाए गए कॉल सेंटर 1912 का निरीक्षण कर रहे थे।

इसी दौरान आए एक फोन ने खलबली मचा दी। फोन करने वाले ने कहा कि उनकी गांव की बिजली काट दी गई है। लाइनमैन बिजली जोड़ने के लिए दो हजार रुपए मांग रहा है। इतना सुनते ही एके शर्मा एक्शन में आ गए और वहीं खड़े-खड़े ही लाइनमैन को नौकरी से निकालने का आदेश जारी कर दिया।

एके शर्मा ने दोहराया कि वे प्रदेश में बिजली सेवाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हमारे लिए उपभोक्ता सर्वोपरि हैं और मेरा संकल्प है कि बिजली विभाग में भ्रष्टाचार, ढिलाई और उपेक्षा को खत्म करके एक उत्तरदायी और पारदर्शी प्रणाली तैयार करूंगा। जब तक यह विभाग जनहित की भावना से नहीं चलेगा, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग को दुरुस्त करके ही रहूंगा।

एके शर्मा शुक्रवार को 1912 शिकायत नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान जब वे नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे, उसी समय बहराइच जिले के रणजीतपुर सब स्टेशन के अंतर्गत गंडेरियन पुरवा गांव से एक उपभोक्ता का महिला कर्मचारी ने कॉल रिसीव किया। उपभोक्ता ने बताया कि उनके यहां का बिजली कनेक्शन एक लाइनमैन ने काट दिया है और दो हजार रुपये की मांग कर रहा है। इस पर मंत्री ने संबंधित लाइनमैन नेपाली को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का निर्देश दिया।

इसके बाद ऊर्जा मंत्री विधानसभा क्षेत्र के 33/11 केवी उपकेंद्र पहुंचे। जहां उन्होंने वहां तैनात कर्मचारियों से बातचीत की और जाना कि क्षेत्र की शिकायतों का किस तरह से निस्तारण हो रहा है। उन्होंने पाया कि कई शिकायतों को निस्तारित करने में अनावश्यक विलंब हो रहा है। इसकी वजह से उपभोक्ताओं को परेशानी होती है।

इस दौरान मंत्री ने निर्देश दिया कि दुर्घटना, भ्रष्टाचार, बार-बार की शिकायत, संवेदनशील उपभोक्ता, वीआईपी कॉल या तकनीकी बाधाओं से जुड़ी समस्याओं को 'विशेष फ्लैगिंग कैटेगरी' में चिह्नत किया जाए और उनका समाधान तत्काल प्राथमिकता पर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी शिकायतों की निगरानी उच्च स्तर पर होनी चाहिए ताकि कोई भी उपभोक्ता उपेक्षा का शिकार न हो।