वाराणसी में 54 गांव बाढ़ की चपेट में, घाट-सड़क, मकान डूबे, एक युवक की मौत भी

वाराणसी में 54 गांव बाढ़ की चपेट में, घाट-सड़क, मकान डूबे, एक युवक की मौत भी

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वाराणसी में 54 गांव बाढ़ की चपेट में, घाट-सड़क, मकान डूबे, एक युवक की मौत भी

वाराणसी में बाढ़ का कहर जारी है। गंगा, वरुणा, गोमती और नाद नदियों में एक साथ उफान से तटवासियों ही नहीं बल्कि नदियों से दूर के गांवों के लोग भी चिंतित हैं। नदियों में लगातार बढ़ाव के कारण एक-एक कर गांव चपेट में आ रहे हैं।

प्रशासन के अनुसार सोमवार तक 54 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। रविवार को यह संख्या 44 थी। यानी महज 24 घंटे में दस और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वहीं शहरी क्षेत्र के 24 वार्ड और मोहल्ले तक पानी पहुंच गया है। घाट, सड़क और मकान डूब गए हैं। वहीं पिसौर और आराजीलाइन ब्लॉक के मरूई, सिहोरवां और जक्खिनी गांवों तक पानी पहुंच गया है। हुकुलगंज निवासी 30 वर्षीय युवक मोनू चौहान की बाढ़ के पानी में डूबकर मौत हो गई है। उसका शव एनडीआरएफ के जवानों ने निकाला। परिवार ने आपदा राहत कोष से मदद की मांग की है।

चिंता की बात यह कि गंगा अभी बढ़ाव पर हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार की रात 12 बजे तक जलस्तर 72.15 मीटर पर पहुंच गया। यह खतरे के निशान से 89 सेमी अधिक है। हालांकि बढ़ाव की गति सोमवार को दिन में काफी कम (0.5 सेमी प्रतिघंटे) रही। लेकिन रात में यह बढ़कर एक सेमी प्रतिघंटा हो गई। हालांकि रफ्तार रविवार के मुकाबले आधी रही। रविवार को गंगा 02 सेमी प्रतिघंटे बढ़ रही थीं। अस्सी, दशाश्वमेध, शीतला घाट, सामने घाट इलाके में गंगा सड़कों तक पहुंच गई हैं। पॉश कॉलोनियां प्रभावित होने लगी है। ग्रामीण इलाकों में आधा दर्जन गांवों का सम्पर्क मार्ग टूट गया है।

चिरईगांव संवाद के अनुसार छितौना, चांदपुर, रामचंदीपुर, मुस्तफाबाद-रेतापार गांवों में आवागमन के मार्गों पर गंगा हिलोरे लेने लगीं। हालांकि इनसे आवागमन जारी है, लेकिन प्रशासन ने सतर्क रहने की हिदायत दी है। छितौना के जयगोविंद यादव ने बताया कि उनका गांव ब्लॉक का सबसे बड़ा पशुपालक क्षेत्र है, जो तीन तरफ से बाढ़ की चपेट में है। चारे की समस्या हो गई है। चांदपुर के प्रधान प्रतिनिधि संजय सोनकर ने बताया कि सोनकर और यादव बस्ती जाने वाले मार्गों पर चार फुट पानी है।

जक्खिनी संवाद ने बताया, सिहोरवा दक्षिणी, शाहंशाहपुर, जक्खिनी के सिवान तक पानी पहुंच गया है। शहंशाहपुर के किसान दिनेश मिश्रा ने बताया कि तीन बीघा बैगन की फसल डूब गई। शहंशाहपुर और मरूई बाढ़ राहत चौकियों पर मवेशियों और परिजनों के साथ पीड़ित पहुंचने लगे हैं। चौबेपुर संवाद के अनुसार पिपरी, लक्ष्मीसेनपुर और टेकरी गांव का सम्पर्क कट गया है। अब नाव के सहारे गांव से शहर की ओर निकल रहे हैं। फसल डूबने से पशुओं को चारे की समस्या है।

शवदाह के लिए छह घंटे तक इंतजार

वाराणसी में बाढ़ से श्मशान घाटों पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को हरिश्चंद्र घाट पर मुख्य मार्ग से कांची कामकोटिश्वर महादेव मंदिर के मोड़ तक पानी पहुंच गया। गली में शवदाह स्थल पर एकसाथ तीन चिंता ही जल पा रही है। जिससे अन्य को छह घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। रुक-रुककर हो रही बारिश से भी लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। मणिकर्णिका घाट पर ज्यादा परेशानी हो रही है। नावों से शवों, लकड़ियों को ले जाया जा रहा है। संकरी गली होने से आवागमन मुश्किल हो गया है। सतुआ बाबा आश्रम के पास तक पानी आने से तमाम परिवारों के लिए परंपराएं निभाना मुश्किल हो रह है। सतुआ बाबा आश्रम के प्रवेश द्वार पर शव रखकर पिंडदान की परंपरा कई परिवारों में होती है। पानी के कारण इसमें दिक्कतें हो रही हैं। मणिकर्णिका घाट के सामने काशी विश्वनाथ द्वार के गेट के आसपास दुकानें भी बंद कराई गई हैं। क्योंकि इसी गेट से अब शवदाह के लिए लोग पहुंच रहे हैं।