घर में 15-18 साल की बेटी है, तो हर पिता को जरूर करने चाहिए ये 5 काम
बेटी और पिता का रिश्ता बहुत ही खास और अनोखा होता है। ये रिश्ता प्यार, भरोसे और अपनेपन से भरा होता है। जैसे-जैसे बेटी बड़ी होती है, तो इस रिश्ते को और भी मजबूती की जरूरत होती है। खासकर जब बेटियां 15 से 18 साल की उम्र में पहुंचती हैं, वो शारीरिक और मानसिक रूप से कई बदलावों से गुजर रही होती हैं।
ऐसे समय उन्हें सबसे ज्यादा अपने पिता के प्यार-दुलार और सहारे की जरूरत होती है। अगर पिता उम्र के इस दौर में बेटी के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं, तो वो हर मुश्किल का सामना आत्मविश्वास के साथ कर पाती हैं। बेटियां इस उम्र में हों तो पिता के कुछ छोटे-छोटे कदम उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। चलिए जानते हैं पिता ऐसे क्या-क्या काम कर सकते हैं।
खुलकर बातचीत करना है जरूरी
15 से 18 साल की उम्र में बेटियों के मन में कई सवाल और इमोशंस होते हैं। ऐसे में एक पिता को चाहिए कि वे अपनी बढ़ती उम्र की बेटी के साथ हर विषय पर खुलकर बात करें। उसकी बातें ध्यान से सुनें और बिना जजमेंट के उसकी भावनाओं को समझें। जब बेटी को लगता है कि उसके पापा उसकी हर बात को सुनते और समझते हैं, तो वो और भी खुलकर अपनी बातें साझा करती है। इससे उनके रिश्ते में विश्वास और गहराई बढ़ती है।
बेटी को मोटिवेट करते रहें
पिता का अपनी बेटी को मोटिवेट करना बहुत जरूरी है। बढ़ती उम्र की बेटी को अपने सपनों को पूरा करने के लिए जरूर प्रोत्साहित करें। उन्हें बताएं कि वे जो चाहें वो कर सकती हैं। जब पिता अपनी बेटी पर विश्वास जताते हैं, तो उसका आत्मबल कई गुना बढ़ जाता है। उसकी सोच पॉजिटिव होती है और वो हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो जाती है।
पिता को बढ़ाना चाहिए बेटी का आत्मविश्वास
बेटी के आत्मविश्वास को बढ़ाना एक पिता की जिम्मेदारी है। पिता को चाहिए कि वो अपनी बेटी को बताएं कि वे कितनी खास हैं और उनमें कितनी क्षमता है। जब पिता बेटी की काबिलियत पर भरोसा दिखाते हैं, तो बेटी में भी खुद पर भरोसा बढ़ता है। आत्मविश्वास से भरी बेटी हर स्थिति में अपने लिए सही फैसले ले सकती है और कॉन्फिडेंस के साथ जीवन की राह में आगे बढ़ती है।
बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है पिता पर
पिता की जिम्मेदारी है कि वो अपनी बेटी की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। बेटी को हमेशा सिक्योर फील कराना, एक पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जब बेटी को ये भरोसा होता है कि उसके पापा हमेशा उसके साथ है, तो वो बिना किसी से डरे, बिंदास होकर अपने जीवन में आगे बढ़ती है। सुरक्षा का एहसास बेटी के आत्मविश्वास और खुशी दोनों के के लिए बहुत जरूरी है।
बनें बेटी के रोल मॉडल
पिता अपनी बेटी के लिए पहला रोल मॉडल होता हैं। बेटी वही सीखती है जो वो अपने पिता में देखती है। इसलिए पिता को चाहिए कि वो अपनी बेटी के लिए एक पॉजिटिव उदाहरण बनें। अपने व्यवहार से बेटी को सिखाएं कि एक अच्छा इंसान कैसे बना जाता है। इससे बेटी भी जीवन में सही मूल्यों को अपनाएगी और एक अच्छी इंसान बनकर जीवन में आगे बढ़ेगी।

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