रायबरेली-तुलसीदास जयंती पर मातृभूमि सेवा मिशन का प्रेरक आयोजन

रायबरेली-तुलसीदास जयंती पर मातृभूमि सेवा मिशन का प्रेरक आयोजन

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रिपोर्ट-केशवानंद शुक्ला

रामचरितमानस मानवता का संविधान, संस्कृति संरक्षण की अमिट अलख : डॉ. चंपा श्रीवास्तव

भारतीय संस्कृति को समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं तुलसीदास 


योग, संस्कार और साहित्य के संगम में श्रद्धा से मनाई गई तुलसी जयंती

डॉ. चंपा श्रीवास्तव : रामायण केवल ग्रंथ नहीं, वह जीवन को दिशा देने वाला प्रकाशपुंज है।


रायबरेली-गोस्वामी तुलसीदास की 528वीं जयंती के पावन अवसर पर मातृभूमि सेवा मिशन इकाई, रायबरेली द्वारा सई नदी तट स्थित ऐतिहासिक शहीद स्थल प्रांगण में एक प्रेरणास्पद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन नि:शुल्क योग प्रशिक्षण शिविर के समापन के साथ संयोजित किया गया, जहां प्रातः 5 से 7 बजे तक योग अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फिरोज गांधी पीजी कॉलेज की पूर्व प्राचार्या एवं कानपुर विश्वविद्यालय कला संकाय अधिवक्ता डॉ. चंपा श्रीवास्तव ने की। डॉ. श्रीवास्तव ने तुलसीदास जी के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। अपने उद्बोधन में उन्होंने रामचरितमानस को "सर्जन हिताय, जीवन निर्माण का शास्त्र" बताते हुए कहा कि यह केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीता-जागता दर्शन है। उन्होंने कहा कि रामायण केवल कथाओं का संकलन नहीं, बल्कि भारतीय नारी गरिमा, मर्यादा, समर्पण और संवेदना का सजीव चित्रण है। सीता जी द्वारा लक्ष्मण और राम के साथ वनगमन करते समय जिस शिष्ट, सुसंस्कृत और मौन भाषा में अपना परिचय दिया गया, वह आज की पीढ़ी के लिए मर्यादा का अनुपम पाठ है। डॉ. श्रीवास्तव ने मॉरीशस में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां आज भी गिरमिटिया मजदूरों की संततियां रामचरितमानस को जीवन की आचार संहिता मानती हैं। प्रत्येक घर में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है, और लोग घर से निकलते समय प्रभु को नमन करते हैं। उन्होंने बताया कि वहां रामायण पीठ की स्थापना की गई है, जहां प्रतिवर्ष तुलसीदास जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। उन्होंने उर्मिला के त्याग और भारतीय नारी की सहनशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि मानस केवल राम-सीता की कथा नहीं है, यह उस समग्र स्त्री चेतना का प्रतिनिधित्व करती है जो हमारे संस्कारों की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र विखंडन और सांस्कृतिक विस्मृति की ओर बढ़ रहा हो, तब रामचरितमानस एक नैतिक संहिता बनकर मानवता को दिशा देता है। उन्होंने मातृभूमि सेवा मिशन इकाई द्वारा संचालित कार्यक्रमों की प्रशंसा किया और मिशन के संस्थापक डॉक्टर श्री प्रकाश मिश्रा द्वारा किए जा रहे राष्ट्रीय स्तर पर प्रयासों की सराहना की।
संस्था के संयोजक प्रदीप पांडेय ने तुलसी जयंती की भव्य व्यवस्था की और अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के समाज को मानस से प्रेरणा लेकर व्यक्तिगत व पारिवारिक स्तर पर आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता है।इस अवसर पर तुलसीदास जी के साहित्य को राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण का अमर ग्रंथ बताते हुए, उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम समापन पर राष्ट्रगान के साथ उपस्थितजनों ने भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना को अक्षुण्ण बनाए रखने का आह्वान किया।
योग प्रशिक्षण का संचालन नियमित प्रशिक्षिका सोनम गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में राज अग्रहरि, कल्लू राम अग्रहरि, राकेश यादव, राजपाल सिंह, सुमन, गीता देवी, माया, दिनेश मिश्रा, दिनेश पांडेय, मंडल अध्यक्ष भगवत प्रताप सिंह, संदीप, अनुज, प्रकाश सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।