रायबरेली-नल है, पानी टंकी है, फिर भी ग्रामीण तरस रहे एक एक बूंद के लिए

रायबरेली-नल है, पानी टंकी है, फिर भी ग्रामीण तरस रहे एक एक बूंद के लिए

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कतार में खड़े होकर करते हैं अपनी बारी का इंतजार, तब नसीब होता है बाल्टी भर पानी


पानी की किल्लत कई वर्षों से झेल रहे ग्रामीण सुनने वाला कोई भी नहीं


लालगंज रायबरेली। ग्रामीण पेयजल योजना के तहत लाखों की लागत से बनी बाजपेयीपुर  सोडांसी गांव में पेयजल योजना की टंकी बदहाली का शिकार है। पाइप लाइन से लेकर टंकी के निर्माण जो खेल हुआ, वह अलग है। ग्रामीणों की माने तो लगभग 10 वर्षों से बोर भस्ट है। मोटर में जंग लग चुका है। पानी की टंकी तक जाने का भी रास्ता नही है। वहा पूरा जंगल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों को गांव के किनारे से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी तय कर पानी लाना पड़ता है कोई बाल्टी से तो कोई पीपा से तो कोई साइकिल से और कोई कंधे से पानी लेकर आता है, कई राजनेता गांव में कार्यक्रम में सम्मिलित होने तो आते हैं लेकिन किसी की नजर इस गांव के पेयजल की व्यवस्था पर नहीं पड़ती है। गांव के ही आदर्श आनंद मिश्रा, ओम नमः शिवाय तिवारी,जानकी शरण त्रिवेदी, दुर्गा दीक्षित, वंश गोपाल दीक्षित, जगन्नाथ द्विवेदी, राम आसरे साहू, बुधाना देवी, सावित्री, कोमल, मंजुला, विमला देवी,चन्द्र मणि सोनी, लल्ला मिश्रा का कहना है कि गांव में ही सरकारी स्कूल इंटर कॉलेज है पेयजल शुद्ध न होने की वजह से गांव के लोग स्कूल में बच्चों को न पढ़ाकर बाहर पढ़ाते हैं। गांव के किनारे एक हैंडपंप है जहां पर भी कतार में लोग खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं तब जाकर कहीं एक दो बाल्टी पानी मिलता है। इसके चलते ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर से पानी लाना मजबूरी है। गावो में लगे इंडिया मार्का नल खारा पानी उगल रहे हैं। वह भी पूरी तरह से खराब पड़े हुए ग्राम प्रधान का ध्यान भी इधर नहीं पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की दिक्कत होने की वजह से लोग गांव में शादी करने के लिए तैयार नहीं होते हैं लोग मजबूर है आखिर यह ग्रामीण जाएं तो कहां जाएं किसके पास शिकायत लेकर जाएं कौन है उनकी पीड़ा सुनने वाला क्षेत्रीय विधायक चाहे वर्तमान हो या पूर्व हूं दोनों के पास इन्होंने चक्कर लगाए मिला क्या सिर्फ आश्वासन। ग्रामीणों ने बताया कि यदि पेयजल की व्यवस्था सही नहीं की गई तो गांव के बाहर से ही राजनेता को बाहर कर दिया जाएगा गांव में प्रवेश करना वर्जित है का बोर्ड लगाएंगे और साथ में जल नहीं तो वोट नहीं का भी बैनर लगवाएंगे ग्रामीणों ने जल नहीं तो वोट नहीं के नारे भी लगाए। फिर भी इन ग्रामीणों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं।