रायबरेली-भ्रष्टाचार की बुनियाद पर किया जा रहा तालाब सौंदर्यीकरण कारण कार्य,........

रायबरेली-भ्रष्टाचार की बुनियाद पर किया जा रहा तालाब सौंदर्यीकरण कारण कार्य,........

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    रिपोर्ट-सागर तिवारी


ऊंचाहार/रायबरेली: नगर पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। "नगरीय झील/पोखर/तालाब संरक्षण योजना" के अंतर्गत वार्ड नंबर 4, खत्री टोला स्थित दीवान तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में मानक को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। तालाब के किनारे इंटरलॉकिंग सड़क और सौंदर्यीकरण का कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिख रहा है। निर्माण स्थल पर प्रथम श्रेणी की ईंटों के बजाय पीले और दोयम दर्जे के ईंटों का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानकों की अनदेखी इस कदर है कि बिना गिट्टी डाले और कुटाई किए सीधे इंटरलॉकिंग बिछाई जा रही है। सीमेंट और मौरंग का मिश्रण भी इतना कमजोर है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही उखड़ने लगा है।
इस पुरे मामले को लेकर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अरशद सुल्तान ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने बताया कि यह कार्य उनके कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था, जिसके लिए सचिवालय से 30 लाख रुपये की लागत की धनराशि राज्य सरकार द्वारा आवंटित की गई थी। आगे अरशद सुल्तान ने कहा, "हमारी मंशा थी कि जनता के पैसे का सदुपयोग हो। पहली किस्त आने पर हमने काम शुरू करवाया था, लेकिन वर्तमान में जिस तरह की घटिया गुणवत्ता अपनाई जा रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। मैंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी जिम्मेदारों को आगाह किया है। 
अरशद सुल्तान ने भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों और नगर पंचायत के जिम्मेदारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सभासद के पास वित्तीय अधिकार नहीं होते, इसलिए जो अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाब देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और भ्रष्टाचार नहीं रुका, तो वे नगर पंचायत गेट के सामने अन्न त्याग कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि प्रथम नागरिक होने के नाते उन्हें अपने पद की गरिमा और सरकारी धन की पारदर्शिता का ध्यान रखना चाहिए। स्थानीय निवासियों और बुद्धिजीवियों ने जिलाधिकारी रायबरेली से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि 30 लाख की भारी-भरकम लागत के बावजूद पीली ईंटों से विकास की बुनियाद रखी जाएगी, तो यह सौंदर्यीकरण चंद महीनों में ही जमींदोज हो जाएगा और सरकारी का धन का दुरुपयोग होगा।