इलाज के लिए 13 घंटे दौड़ाया, गिड़गिड़ाता रहा परिवार, ओपीडी में मरीज ने दम तोड़ा

इलाज के लिए 13 घंटे दौड़ाया, गिड़गिड़ाता रहा परिवार, ओपीडी में मरीज ने दम तोड़ा

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सीएचसी के डॉक्टर ने मरीज की बीमारी समझ ली, लेकिन सुपर स्पेशलिस्ट मर्ज पहचान ही नहीं समझ पाए। लखनऊ के ट्रॉमा, लारी कार्डियोलॉजी और सीवीटीएस विभाग के बीच परिजन मरीज को लेकर दौड़ते रहे, लेकिन किसी ने हाथ नहीं लगाया।

13 घंटे बाद आखिरकार लारी कार्डियोलॉजी की ओपीडी में जब नंबर आया तो मरीज बेदम होकर फर्श पर जा गिरा। आनन-फानन में उठाकर इमरजेंसी लाया गया तो डॉक्टरों ने चेक कर मृत करार दे दिया। यह हाल है केजीएमयू की व्यवस्था और उसके डॉक्टरों का। यह सब तब हुआ, जब लारी कार्डियोलॉजी के ठीक सामने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बुधवार को बवाल के बाद ट्रॉमा के निरीक्षण में जुटे थे।

परिजन बोले ऑक्सीजन लगा देते तो शायद बच जाती जान

परिजनों का आरोप है कि रातभर इस विभाग से उस विभाग, इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग दौड़ाया जाता रहा। डॉक्टर यदि आक्सीजन ही लगा देते तो शायद मरीज इस तरह तड़पकर दम नहीं तोड़ता। रात एक बजे ट्रामा में पंजीकरण के लिए लाइन लगाई हरदोई के सविहर गांव निवासी रघुनंदन सिंह (35) को बुधवार रात करीब नौ बजे सीने में दर्द हुआ। परिजन मरीज को लेकर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद लारी ले जाने की सलाह दी। रात करीब साढ़े 11 बजे परिजन रघुनंदन को लारी लाए।मगर आरोप है कि डॉक्टरों ने मरीज को देखते ही ट्रॉमा ले जाने की सलाह दी। करीब एक बजे मरीज को लेकर ट्रॉमा ले जाकर पंजीकरण के लिए लाइन लगाई।

बेबस तीमारदार दोबारा लारी पहुंचे

लंबी जद्दोजहद के बाद डॉक्टरों ने मरीज को देखा और हृदय रोग बताकर मरीज को लारी ले जाने को कहा। बेबस तीमारदार मरीज को लेकर दोबारा लारी इमरजेंसी पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों ने पहले मरीज को इमरजेंसी में घुसने ही नहीं दिया। काफी कहासुनी के बाद परिजन मरीज को लेकर अंदर दाखिल हो पाए। बेड खाली न होने की बात कही डॉक्टरों ने यहां डॉक्टरों ने चेक कर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत बताई मगर बेड खाली न होने की बात कहते हुए मरीज को कॉर्डियो वैस्कुलर थोरैसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग ले जाने की सलाह दी। यहां से परिजन मरीज को लेकर सीवीटीएस पहुंचे तो आरोप हैं कि डॉक्टरों ने लारी का केस बताते हुए मरीज को फिर लौटा दिया। इस तरह मरीज को लेकर तीमारदार भटकते रहे।

नाराज परिजनों ने का हंगामा, अफरातफरी मची
एक-एक सांस के लिए तड़पता रघुनंदन दोपहर करीब एक बजे ओपीडी की फर्श पर बेहोश होकर गिर पड़ा। आनन-फानन तीमारदार मरीज को लेकर इमरजेंसी पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पूरे 13 घंटे मरीज लेकर विभागों के धक्के खाते रहे परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने लारी में हंगामा कर दिया। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने किसी तरह शांत कराया। जिंदगी की आस में रघुनंदन को लाए परिजन शव लेकर रोते-बिलखते लौट गए। परिजनों का आरोप है कि समय पर मरीज को इलाज नहीं मिला। करीब 13 घंटे मरीज को एक से दूसरे विभाग तक दौड़ लगाते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आक्सीजन ही लगा देते तो शायद मरीज की जान बच जाती।

इमरजेंसी में गिड़गिड़ाते रहे, नहीं पसीजे डॉक्टर

लारी इमरजेंसी में परिजन मरीज को भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। आखिर में एक कर्मचारी ने मरीज को ओपीडी में दिखाने की सलाह दी। सुबह परिजन ओपीडी पंजीकरण के लिए कतार में लग गए मगर दोपहर एक बजे तक मरीज का नम्बर ही नहीं आया। इस बीच मरीज को सांस लेने की तकलीफ बढ़ती जा रही थी।

केजीएमयू प्रवक्ता डॉक्टर सुधीर सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में मरीजों का दबाव है। लारी में आने वाले सभी मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बिना इलाज मरीज के मौत की जानकारी नहीं है। यदि तीमारदार शिकायत करते हैं, तो उसकी जांच कराई जाएगी।