रायबरेली:यह बजट आम आदमी की बजाय बड़े उद्योगों और पूंजीगत हितों को अधिक प्राथमिकता-अतुल सिंह

रायबरेली:यह बजट आम आदमी की बजाय बड़े उद्योगों और पूंजीगत हितों को अधिक प्राथमिकता-अतुल सिंह

-:विज्ञापन:-



   रिपोर्ट-सागर तिवारी 


मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट से आम नागरिक,मध्यम वर्ग,किसानों और युवाओं को महंगाई से राहत, रोजगार सृजन और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं को निराशा हुई है बजट का समग्र अध्ययन यह दर्शाता है कि यह आम जनता की जमीनी समस्याओं को प्राथमिकता देने में कमजोर रहा है।
बढ़ती महंगाई, शिक्षा,स्वास्थ्य,आवास और रोजमर्रा के खर्चों के मुकाबले अपर्याप्त है। 
महंगाई नियंत्रण के लिए पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और आवश्यक वस्तुओं पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई,जबकि यही खर्च आम परिवार को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।
बेरोजगारी देश की एक गंभीर समस्या बनी हुई है। स्थायी और गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के लिए कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आई, जिससे विशेषकर शिक्षित युवाओं में निराशा है।
कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने के दावे दोहराए गए, परंतु खेती की बढ़ती लागत, एमएसपी की गारंटी और छोटे किसानों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में अपेक्षित निवेश की कमी और निजीकरण पर बढ़ता जोर चिंता का विषय है।
यह बजट आम आदमी की जरूरतों के बजाय बड़े उद्योगों को प्राथमिकता देने वाला है। देश को ऐसे बजट की आवश्यकता है जो आम नागरिक के जीवन में वास्तविक राहत और भरोसा पैदा करे।