ऊंचाहार:भ्रष्टाचार की बुनियाद पर बेटियों का भविष्य: ऊंचाहार में मानकों की उड़ी धज्जियाँ

ऊंचाहार:भ्रष्टाचार की बुनियाद पर बेटियों का भविष्य: ऊंचाहार में मानकों की उड़ी धज्जियाँ

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  रिपोर्ट-सागर तिवारी

रायबरेली (ऊंचाहार): उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर शिक्षा के स्तर को सुधारने और बेटियों को सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देने का दावा कर रही है, वहीं रायबरेली के ऊंचाहार विकास खण्ड से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सिस्टम के दावों की पोल खोल रहा है। विकास खण्ड की ग्राम पंचायत पट्टी रहस कैथवल स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
घटिया सामग्री का 'खुला खेल'
मौके पर हो रहे निर्माण कार्य में मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो इस लाखों की लागत वाली इमारत में पीले और बेहद घटिया गुणवत्ता की ईंटों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। निर्माण की स्थिति ऐसी है कि किसी तकनीकी विशेषज्ञ की आवश्यकता नहीं; एक साधारण व्यक्ति भी पहली नज़र में देख कर ईंटों की बर्बादी और निम्न स्तर के मसाले (सीमेंट-मोरंग मिश्रण) की गुणवत्ता का अंदाज़ा लगा सकता है।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल
आवासीय विद्यालय होने के नाते यहाँ सैकड़ों बेटियां रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करेंगी। ऐसे में "पीली ईंटों" और कमजोर मसाले से तैयार यह दो मंजिला ढांचा भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहा है। निर्माण कार्य में इस स्तर की धांधली विभाग के ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
कार्रवाई की दरकार
लाखों रुपये के सरकारी बजट का बंदरबांट कर बनाई जा रही इस इमारत की दीवारों में अब 'भ्रष्टाचार की दरारें' साफ दिखने लगी हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनकी बेटियों के विद्यालय को असुरक्षित बनाया जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फाइलों में इस 'भ्रष्ट निर्माण' को पास कर दिया जाएगा