रायबरेली-एपीओ मनरेगा की कमीशन खोरी से सर चढकर बोल रहा भ्रष्टाचार,,,,?

रायबरेली-एपीओ मनरेगा की कमीशन खोरी से सर चढकर बोल रहा भ्रष्टाचार,,,,?

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रिपोर्ट-सागर तिवारी 



ऊंचाहार-रायबरेली-मनरेगा कार्यों में केन्द्र सरकार प्रति वर्ष करोडों रुपए खर्च करती है। मनरेगा योजना के अन्तर्गत सरकार ने रोजगार देने के साथ गांव के विकास कराने का एक बेहतरीन योजना बनाकार उसपर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती आ रही है। लेकिन एपीओ मनरेगा की कमीशन खोरी से इस योजना में भी भ्रष्टचार सर चढ़ कर बोल रहा है। एपीओ मनरेगा ने जिले तक के अधिकारियों के साथ सेटिंग गेटिंग रखी है जिससे जिससे उन आधिकारियों को भी स्वीकृति राशि का एक प्रतिशत से दो प्रतिशत एपीओ मनरेगा द्वारा पहुंचाया जाता है। 
            ऊंचाहार विकास खण्ड कार्यालय में तैनात एपीओ मनरेगा की मनमानी देखने को मिली है। सूत्र बताते हैं कि ग्राम सभाओं में मनरेगा के अन्तर्गत होने वाले कच्चे पक्के कार्यों में धनराशि स्वीकृति कराने और सेवा वृद्धि एवं फर्जी बिल पास कराने के एवज में एपीओ मनरेगा जबरन कमीशन लेती हैं। बताते हैं कि एपीओ मनरेगा स्वीकृति धनराशि का एक प्रतिशत खुद का चार्ज लेती हैं और एक से दो प्रतिशत डीसी मनरेगा के नाम तथा पांच प्रतिशत बीडीओ और सीडीओ के नाम पर वसूल करती हैं। एपीओ मनरेगा ने मनरेगा योजना को लूट का अड्डा बना रखा है। इनके अवैध वसूली से योजना में भीषण भ्रष्टाचार व्याप्त है। एपीओ मनरेगा तकरीबन दस वर्षों से इसी विकास खण्ड कार्यालय में तैनात हैं और इस विकास खण्ड क्षेत्र 54 ग्राम सभाएं हैं। 54 ग्राम सभाओं से अनुमानित तौर पर यदि प्रति ग्राम सभा से प्रतिमाह न्यूनतम दर से एक लाख रूपये वसूलती हैं तो 54 ग्राम सभा से 100000 X54 = 5,400,000 रूपए होते हैं। यदि एक माह के 5,400,000 होते हैं तो एक वर्ष का 64,800,000 रूपये होते हैं। एपीओ मनरेगा इस विकास खण्ड कार्यालय में तकरीबन दस वर्षों से तैनात हैं तो दस वर्ष के 120 माह होते हैं और एपीओ मनरेगा की एक माह की कमीशन धनराशि 5,400,000 होती है तो इस तरह से 120 माह X 5,400,000 =648,000,000 रूपए होती है। अब सोचिए ये धनराशि तो मात्र मनरेगा कार्यों की धनराशि फाइल स्वीकृति की है। तो सेवा वृद्धि और फर्जी बिल की वसूली की धनराशि कितनी होगी। एपीओ मनरेगा द्वारा सरकार के 648,000,000 रूपये की इतनी मोटी रकम डकार लिया गया और कोई जांच तक नहीं हुई। कयास लगाया जा रहा है कि यदि जांच की तलवार लटकी तो एपीओ ममरेगा जद में आ जायेंगी और उनके साथ कंप्यूटर ऑपरेटर और लिपिक पर भी गाज गिरेगी। अन्य श्रोतों से की गई अवैध वसूली खाका अगले अंक में खींचा जायेगा। सूत्रों से एपीओ मनरेगा द्वारा अवैध वसूली के कुछ साक्ष्य हमारे हाथ लगे हैं। जिसे परमाणिकता के आधार के बाद प्रकाशित किया जायेगा।