डिजिटाइजेशन व्यवस्था के खिलाफ एकजुट हुए सभी शिक्षक संगठन

डिजिटाइजेशन व्यवस्था के खिलाफ एकजुट हुए सभी शिक्षक संगठन

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824

जिले के सभी शिक्षक संगठनों ने कहा हमारी मांग न पूरी होने तक नहीं अपनाएंगे डिजिटाइजेशन व्यवस्था

बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों की तरफ से जबरदस्ती तरीके से थोफी जा रही डिजिटाइजेशन व्यवस्था


विकास भवन प्रांगण में नौ संगठन के जिलाध्यक्ष ने इस व्यवस्था का किया विरोध



रायबरेली-बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों की तरफ से जबरदस्ती तरीके से थोफे जा रहे डिजिटाइजेशन के खिलाफ जिले के सभी शिक्षक संगठन एक बैनर तले आ गए हैं। विभाग डिजिटाइजेशन व्यवस्था में शिक्षकों की समस्याओं को नजरंदाज करते हुए लागू करने जा रहा है। जिसके कारण जनपद के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कार्मिक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है एवं अत्यन्त रोष व्याप्त है। गुरुवार विकास भवन प्रांगण में जूनियर शिक्षक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समर बहादुर सिंह की अध्यक्षता में सामूहिक बैठक करके संगठनों द्वारा डिजिटाइजेशन के सम्बन्ध में उठायी गई मौलिक समस्याओं के समाधान तक उक्त डिजिटाइजेशन का पूर्णं बहिष्कार है। 

बीएसए को सामूहिक रूप से ज्ञापन देते उत्तर प्रदेश जूनियर शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उर्दू शिक्षक संघ, एस0सी0एस0टी0 शिक्षक संघ, आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक एसोसिएशन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष व पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक हम लोगों की मांग को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक हम लोग इस व्यवस्था को नहीं अपनाएंगे। सरंक्षक समर बहादुर सिंह ने कहा कि शिक्षा महानिदेशक उत्तर प्रदेश के कार्यालय आदेश दिनांक 10 नवंबर 2023 द्वारा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के 7 जनपदों ( लखनऊ मण्डल व श्रावस्ती जनपद) के विद्यालयों में 20 नवम्बर 2023 से डिजिटाइजेशन व्यवस्था को जनपद में लागू किया गया है। लेकिन डिजिटाइजेशन व्यवस्था में हम समस्याओं को नजरंदाज कर लागू किया गया है। जिसकी वजह से हम लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष राघवेंद्र यादव ने कहा कि डिजिटाइजेशन की वर्तमान ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था शोषणकारी है, इसमें शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को आये दिन शोषित होना होगा, जिससे भय व असुरक्षा के वातावरण में शिक्षक की सृजनात्मक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तथा शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा। अतः बेसिक शिक्षा में ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था अन्य विभागों की भांति ही लागू की जाये।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि आकस्मिक अवकाश की श्रेणी में "हाफ डे लीव" का प्राविधान बेसिक शिक्षा में भी किया जाए, जिससे आकस्मिता की स्थिति में शिक्षक हाफ डे लीव का उपभोग कर सकें। आरएसएम के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया में प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक को पदस्थापित किया जाए तथा इंचार्ज प्रधानाध्यापक की व्यवस्था को समाप्त किया जाए। जिससे प्रधानाध्यापक शिक्षण कार्य से मुक्त होकर शासन की मंशा के अनुरूप प्रबन्धक के रूप में विद्यालय व्यवस्था का संचालन, डिजिटाइजेशन, बैठकों का आयोजन, अभिभावक सम्पर्क सहित सभी कार्य सम्पादित कर सके। डीपीए के जिलाध्यक्ष अशोक प्रियदर्शी ने कहा कि जिले के अन्दर शिक्षकों के  स्थानान्तरण की प्रक्रिया प्रारम्भ कर उन्हें उनके निवास के विकास खण्ड अथवा निकटस्थ विकास खण्ड में विकल्प लेकर स्थानांतरित किया जाए। जिससे शिक्षक पूर्णं मनोयोग से प्रदेश को निपुण प्रदेश बनाने का कार्य कर सकेगें तथा मार्ग दुघर्टना की सम्भावना भी कम होगी।

उर्दू शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मोइनुल हक ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा का लाभ राज्य कर्मचारियों की भांति बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को भी प्रदान किया जाए। शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष अजित सिंह और अजय प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य कर्मचारियों की भांति शिक्षकों को भी प्रतिवर्ष 31 अर्जित अवकाश प्रदान किया जाएं। अवकाश के दिनों में कार्य करने पर देय प्रतिकर अवकाश की व्यवस्था अन्य विभागों की भांति बेसिक शिक्षा विभाग में भी लागू की जाये। शिक्षणेत्तर संघ के जिलाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने कहा कि टाइम एंड मोशन स्टडी आदेश 14 अगस्त 2020 में निर्धारित विद्यालय अवधि ग्रामीण परिवेशीय वातावरण के प्रतिकूल है । अतः बेसिक शिक्षा के ग्रामीण परिवेशीय विद्यालयों का शिक्षण समय प्रकृति के अनुकूल ग्रीष्मकाल में 7-12 तथा शीतकाल में प्रातः 9 से 3 बजे तक किया जाए। विकास भवन में संचालित बैठक का संचालन संजय कनौजिया और मधुकर सिंह ने किया। 

इस मौके पर अनूप सिंह, रवि श्रीवास्तव, सुनील यादव, गौरव युवराज, अजय प्रताप सिंह, अखिलेश चौरसिया, दिनेश, मेराज, शिव कुमार सिंह, भानु प्रताप सिंह, रामभरत राजभर, हरिवंश सिंह, जयकरन सिंह, रविकांत शुक्ला, राम प्रसाद, हरिकेश यादव,  संध्या त्रिवेदी, सियाराम यादव सहित दर्जनों शिक्षक मौजूद रहे।