ऊँचाहार में वन माफिया बेखौफ, हरे नीम के पेड़ पर चलाई आरी, लकड़ी लदा वाहन सीज,,,

ऊँचाहार में वन माफिया बेखौफ, हरे नीम के पेड़ पर चलाई आरी, लकड़ी लदा वाहन सीज,,,

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    रिपोर्ट-सागर तिवारी




ऊँचाहार/रायबरेली:प्रदेश में हरियाली बचाने के लिए सरकार भले ही पौधारोपण पर जोर दे रही हो, लेकिन रायबरेली के ऊँचाहार कोतवाली क्षेत्र में लकड़ी ठेकेदार वन नियमों को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला क्षेत्र के बाबा का पुरवा गाँव का है, जहाँ शनिवार को बिना अनुमति के एक हरे-भरे प्रतिबंधित नीम के पेड़ को धराशाई कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाँव निवासी लल्लन मौर्य के स्वामित्व वाले एक स्वस्थ नीम के पेड़ पर ठेकेदार की नजर पड़ गई। वन संरक्षण अधिनियम के तहत नीम एक प्रतिबंधित श्रेणी का वृक्ष है, जिसे बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नहीं काटा जा सकता। बावजूद इसके, ठेकेदार ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शनिवार को दिनदहाड़े पेड़ को काट डाला। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरण प्रेमियों में भी रोष है।
वन विभाग की कार्रवाई
मामले की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। वन दरोगा शरद बाजपेयी ने मौके पर पहुँचकर जांच की और त्वरित कार्रवाई करते हुए कटी हुई लकड़ी से लदे वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। वन दरोगा ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और इस मामले में वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
क्यों है यह चिंताजनक?
नीम न केवल एक ‘प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर’ है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में इसका विशेष स्थान है। चंद रुपयों के लालच में ऐसे हरे पेड़ों की कटान भविष्य के लिए एक बड़ा पर्यावरणीय खतरा है। प्रशासन की यह तत्परता सराहनीय है, लेकिन ऐसे कृत्यों पर पूर्ण लगाम लगाने के लिए क्षेत्र में सघन निगरानी की आवश्यकता है।